उपराष्ट्रपति (Part 14)

संविधान के अनुच्छेद 63 में उपराष्ट्रपति का उपबन्ध है। जो देश का दूसरा सर्वोच्च पद है। संविधान में यह प्रावधान संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है।

    अनुच्छेद 64- उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है तथा वह अपनी पदावधि के दौरान अन्य कोई लाभ का पद ग्रहण नहीं करता।

क्र.स.नामकार्यकालकार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति
1.डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन13 मई 1952 से 12 मई 1962डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
2.डॉ० जाकिर हुसैन13 मई 1962 से 12 मई 1967डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन
3.वी० वी० गिरी13 मई 1967 से 3 मई 1969डॉ० जाकिर हुसैन
4.गोपाल स्वरूप पाठक31 अगस्त 1969 से 30 अगस्त 1974वी० वी० गिरी
5.बी० डी० जत्ती31 अगस्त 1974 से 30 अगस्त 1979डॉ० फखरूदीन अली अहमद
6.मो० हिदायतुल्लाह31 अगस्त 1979 से 30 अगस्त 1984नीलम संजीव रेड्डी
7.रामास्वामी वेंकटरमन31 अगस्त 1984 से 27 जुलाई 1987ज्ञानी जैल सिंह
8.शंकर दयाल शर्मा3 सित्तम्बर 1987 से 24 जुलाई 1992रामास्वामी वेंकटरमन
9.के० आर० नारायणन21 अगस्त 1992 से 24 जुलाई 1997शंकर दयाल शर्मा
10.कृष्णकान्त21 अगस्त 1997 से 27 जुलाई 2002के० आर० नारायणन
11.भैरो सिंह शेखावत19 अगस्त 2002 से 21 जुलाई 2007ए० पी० जे० अब्दुल कलाम
12.मोहम्मद हामिद अंसारी11 अगस्त 2007 से 11 अगस्त 2012प्रतिभा पाटिल
13.मोहम्मद हामिद अंसारी11 अगस्त 2012 से कार्यरतप्रणव मुखर्जी
14.एम. वेंकैया नायडू8 अगस्त 2017 से पदस्थरामनाथ कोविन्द

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन-

  • अनुच्छेद 66 में उपबन्धित हैं। जिसके अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होगा जिसमें केवल संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य भाग लेते है।
  • उपराष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया राष्ट्रपति के समान ही होती है।
  • उपराष्ट्रपति पद के लिए 20 प्रस्तावक तथा 20 अनुमोदक होना अनिवार्य है।
  • अनुच्छेद 69 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है तथा वह अपनी पदावधि के दौरान कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।

योग्यताएं – अनुच्छेत 66 के अनुसार-

    (I) वह भारत का नागरिक हों।

    (II) 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हों।

    (III) राज्य सभा का सदस्य होने की योग्यता रखता हो।

उपराष्ट्रपति की पदावधि-अनुच्छेद 66 के उपबन्धों के अनुसार-

    (I) पद ग्रहण तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक।

    (II) राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा पद -त्याग।

    (III) राज्य सभा के संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा जिसे राज्य सभा के समस्त सदस्यों ने बहुमत से पारित किया हो तथा लोक सभा सहमत हों।

    (IV) उपराष्ट्रपति पुनर्निवांचन के योग्य हैं।

नोट- हटाने संबंधी संकल्प केवल राज्यसभा में ही रखा जा सकता है।

उपराष्ट्रपति का पद निम्न कारणों से रिक्त हो सकता है।

    (I) पाँच पर्ष की अवधि की समाप्ति पर।

    (II) त्याग पत्र दिये जाने पर।

    (III) मृत्यु, पद से हटाये जाने पर।

  • पदत्याग, मृत्यु, पद से हटाये जाने की स्थिति में शीघ्रअतिशीघ्र चुनाव के पश्चात् नया निर्वाचित उपराष्ट्रपति पद ग्रहण करने के बाद पाँच वर्ष तक पद धारण करता है।
  • उपराष्ट्रपति के चुनाव संबंधित सभी विवादों की जांच और निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा की जायेगी और उसका निर्णय अन्तिम होगा।
  • वर्तमान में उपराष्ट्रपति का राज्यसभा के सभापति के रूप में मासिक वेतन 4,00,000 रु हैं। यह भारत की सोचत निधि पर भारित होता है।

उपराष्ट्रपति के कार्य-

1. उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। लेकिन वह राज्य सभा का सदस्य नहीं होता है सभापति के रूप में राज्य सभा के कार्यों का संचालन करता है।

2. सदन में पेश किये गये विधेयकों पर चर्चा के पश्चात मतदान की व्यवस्था करता है।

3. सदन में पूछे जाने वाले प्रश्नों को तय करता है।

4. राज्य सभा में उसे मतदान का अधिकार नहीं है किन्तु सभापति के रूप में निर्णायक मत देने का अधिकार है।

5. उपराष्ट्रपति दिल्ली विश्व विद्यालय का पदेन कुलपति होता है ।

राष्ट्रपति के रूप में कार्य-

  • यदि किसी कारण वश राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए उसके सभी कृत्यों को उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है। जब तक नया राष्ट्रपति निर्वाचित न हो जाए दूसरा, जब तक राष्ट्रपति अपने पद को पुन: न संभाल लें।
  • इस दौरान उपराष्ट्रपति वही विशेषाधिकार, भत्ते और शक्तियाँ प्राप्त करता है जो राष्ट्रपति को मिलती है। इस दौरान राज्य के कर्तव्यों का पालन वहीं करेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य-

  • प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधा कृष्णन लगातर दो कार्यकाल तक उपराष्ट्रपति थे।
  • कृष्णकांत ऐसे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति थे जिनकी मृत्यु कार्यकाल के दौरान हो गयी थी।
  • डॉ० एस० राधाकृष्णन, मो० हिदायतुल्ला और डॉ० शंकर दयाल शर्मा निर्विरोध निर्वाचित उपराष्ट्रपति थे।

नोट:-

  • अनुच्छेद 70 के उपबन्धों के आधार पर संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों पद रिक्त होने पर संसद जैसा उचित समझे आकस्मिक राष्ट्रपति के कृत्यों के लिए उपबन्ध करें-
  • यदि किसी कारण से उपराष्ट्रपति नहीं उपलब्ध है तो उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश यदि वह भी नहीं है तो उच्चतम न्यायालय का श्रेष्ठतम न्यायाधीश जो उपलब्ध हों राष्ट्रपति का कार्य करंगा।
  • उपराष्ट्रपति जब राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है तो वह अधि कतम 6 माह तक राष्ट्रपति का पद संभाल सकता है।
  • उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभा पति होता है। राज्य सभा के सभापति के वेतन और भत्ते संचित निधि पर भारित होते है।

 

Leave a Reply

%d bloggers like this: