गुप्तकाल | History Notes by Mukesh Sir | Part 5

गुप्तकालीन स्थापत्य

गुप्तकाल को भारतीय कला एवं संस्कृति का स्वर्णयुग माना जाता है।

गुप्तकाल के प्रमुख मंदिर
देवगढ़ का दशावतार मंदिरललितपुर(उत्तर प्रदेश)
तिगवा का विष्णु मंदिरजबलपुर(मध्य प्रदेश)
एरण का विष्णु मंदिरसागर(मध्य प्रदेश)
भूमरा का शिव मंदिरसतना(मध्यप्रदेश)
नचना कुठार का पार्वती मंदिरपन्ना(मध्य प्रदेश)
भीतर गांव का कृष्ण मंदिरकानपुर(उत्तर प्रदेश)
नागोद का शिव मंदिरसतना(मध्यप्रदेश)

गुप्तकालीन शिक्षा एवं साहित्य

गुप्तकालीन साहित्य की विशेषताएं

  • अधिकांश रचनाएं प्रेमप्रधान एवं सुखान्त होती थी।
  • रचनाओं में उच्च वर्ण के पात्र संस्कृत बोलते थे। शूद्र एवं महिलाएं प्राकृत भाषा बोलती थी।

नोट – सेक्सपियर एवं कालिदास की रचनाओं में मुख्य अंतर प्रेमगाथा के अंत का होता है। कालिदास की रचनाएं सुखान्त वाली हैं। जबकि सेक्सपियन की रचनाओं का अंत सुखद नहीं होता।

महाभारत एवं रामायण का अंतिम रूप से संकलन इसी काल में हुआ।

गुप्तकालीन रचनाएं

  • मालविकाग्निमित्रम – कालिदास – अग्निमित्र एवं मालविका की प्रणयकथा
  • अभिज्ञान शाकुन्तलम – कालिदास – दुष्यन्त एवं शकुन्तला की प्रेमकथा।
  • विक्रमोवर्षीयम – कालिदास – सम्राट पुरूरवा एवं उप्सरा उर्वसी की प्रेमकथा।
  • मुद्राराक्षसम् – विशाखदत्त – चन्द्रगुप्त मौर्य कालीन विश्लेषण व कथा।
  • देवीचन्द्रगुप्तम् – विशाखदत्त – चन्द्रगुप्त-2 द्वारा शक राजा का वध एवं ध्रुवदेवी(रामगुप्त की पत्नी) से विवाह।
  • मृच्छकटिकम् – शूद्रक – चारूदत्त एवं वसन्त सेना की प्रेमगाथा।
  • स्वप्नवासदत्तम् – भास – महाराजा उदयन एवं वासवदत्ता की प्रेम कथा।
  • अन्य रचनाएं
    • कालिदास – ऋतुसंहार, मेघदूतम, कुमार सम्भवम, मालविकाग्निमित्रम, रघवंशम, अभिज्ञानशाकुन्तलम, विक्रमोर्वशीयम।
    • दशकुमारचरित्र – दण्डिन, काव्यदर्शन-दण्डिन, अमरकोष -अमरसिंह
    • ब्रह्मसिद्धांत – आर्यभट्ट, सूर्य-सिद्धांत – आर्यभट्ट, आर्यभट्टीयम – आर्यभट्ट।
    • पंचतंत्र – विष्णुशर्मा, कामसूत्र – वात्स्यायन
    • चरक संहिता – चरक, मृच्छकटिकम – शूद्रक

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