गुप्तकाल | History Notes by Mukesh Sir | Part 1

  • गुप्त साम्राज्य की नींव रखने वाला शासक श्री गुप्त था।
  • श्री गुप्त ने ही 275 ई. में गुप्त वंश की स्थापना की थी।
  • मौर्य काल के बाद गुप्त काल को भी भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग माना गया है।
  • गुप्त वंश की जानकारी वायुपुराण से प्राप्त होती है।
  • गुप्तकाल की राजकीय भाषा संस्कृत थी।
  • ये भी माना जाता है कि दशमलव प्रणाली की शुरुआत भी गुप्तकाल में ही हुई थी।
  • मंदिरों का निर्माण कार्य भी गुप्तकाल में ही शुरू हुआ था

गुप्त काल के साक्ष्य

              साहित्यिक साक्ष्य                                                                  अभिलेखीय साक्ष्य

    पुराण – विष्णु पुराण, वायु पुराण एवं ब्राह्मण पुराण                                   समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति

    देवी चन्द्रगुप्तम(विशाखदत्त कृत)                                                          कमारगुप्त का विलसड अभिलेख

    कालीदास की रचनाएं                                                                         स्कन्दन गुप्त का भितरी अभिलेख

    विदेशी यात्री: फाह्यान, ह्नेनसाग आदि।                                                    प्रभावती गुप्त का पूना ताम्रपत्र

गुप्तवंशीय शासक

श्रीगुप्त

  • प्रभावती गुप्त का पूना स्थित ताम्रपत्र अभिलेख के अनुसार श्री गुप्त को गुप्त वंश का आदिराज/आदिपुरूष माना गया है। अतः गुप्त वंश की स्थापना का श्रेय श्री गुप्त को प्राप्त है।
  • श्री गुप्त ने महाराज की उपाधि धारण की थी।

घटोत्कच्च गुप्त

  • यह श्री गुप्त का उत्तराधिकारी था।
  • घटोत्कच्छ ने भी महाराज की उपाधि धारण की थी।

नोट – श्री गुप्त एवं घटोत्कच गुप्त को पूर्ण स्वतंत्र शासक नहीं माना गया है क्योंकि इन दोनो ने महाराज की उपाधि धारण की थी और उस समय महाराज की उपाधि सामन्तों को प्राप्त होती थी तथा पूर्ण स्वतंत्र शासक महाराजाधिराज की उपाधि धारण करते थे। चूंकि चंन्द्रगुप्त-1 ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी इसी कारण चन्द्रगुप्त प्रथम को गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक माना गया है।

चन्द्रगुप्त प्रथम(319ई. – 334ई.)

  • यह गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक था।
  • इसने गुप्त वंश में महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।
  • गुप्त वंश में सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाने वाला शासक यही था।
  • चन्द्र गुप्त प्रथम ने ही गुप्त संवत् की स्थापना की थी।
  • चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया।

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