नागरिकता (Part 9)

किसी व्यक्ति की वह स्थिति होती हैं, जिसमें उसे नागरिक के रुप में वे समस्त अधिकार प्राप्त होते हैं, जो संविधान द्वारा निर्धारित किए गए हैं।

नागरिक- राज्य में निवास करने वाला वह व्यक्ति, जिसे राज्य की पूर्ण सदस्यता प्राप्त है तथा वह अपने राज्य और संविधान के प्रति पूर्ण आस्था रखता है नागरिक कहलाता है।

  • भारत के संविधान के भाग 2 में अनुच्छेद 5 से 11 में नागरिकता का प्रावधान किया गया है। नागरिक वह व्यक्ति होता है जिसे अपने देश में सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं।
  • भारत में ब्रिटेन के समान एकल नागरिकता का प्रावधान किया गया है।
  • नोट- अभी तक 1986, 1992, 2003, 2005, 2015 और 2019 में संशोधन किया जा चुका है।
  • नागरिकता अधिनियम 1955- अनुच्छेद 11 संसद को यह अधिकार देता है कि वह विधि बनाकर नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तय करें। इस अधिनियम के आधार पर 5 प्रकार से भारतीय नागरिकता प्राप्ति के उपबन्ध हैं।
  • 1.  जन्म से, 2. वंशानुक्रम से, 3, पंजीकरण द्वारा, 4. देशीकरण द्वारा, 5. अर्जित भू- भाग द्वारा।
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम 2003- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य विदेशियों को दोहरी नागरिकता प्रदान करना है। यह विधेयक लक्ष्मीमल सिंघवी की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है। इस अधिनियम द्वारा 16 देशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को उनकी विदेशी नागरिकता के साथ भारत की ओवरसीज नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

चतुर्थ अनुसूची में निम्नलिखित देश है-

    1. आस्ट्रेलिया       2. कनाडा             3. फिनलैण्ड

    4. फ्रांस               5. ग्रीनलैण्ड          6. आयरलैण्ड

    7. इजरायल          8. इटली              9. नीदरलैण्ड

    10. न्यूजीलैंड       11. पुर्तगाल         12. साइप्रस

    13. स्वीडन                                    14. स्विटजरलैण्ड

    15. यूनाइटेड किंगडम                      16. अमेरिका

नागरिकता का अन्त-

    (i) किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करने पर।

    (ii) नागरिकता का परित्याग करने पर।

    (iii) सरकार द्वारा नागरिकता से वंचित करने पर।

    (iv) पंजीकरण या देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के 5 वर्ष के भीतर किसी अन्य देश द्वारा 2 वर्ष सजा पाने पर।

(v) किसी भारतीय स्त्री द्वारा विदेशी पुरुष से विवाह करने पर।

(vi) लगातार 7 वर्ष तक देश से बाहर रहने पर।

  • 28 जून 2005 को नागरिकता संशोधन अधिनियम पेश किया गया था। यह अधिनियम नागरिकता अधिनियम 1955 की चौथी अनुसूची को हटाने के लिए था।
  • इस अधिनियम के अनुसार भारतीय मूल के व्यक्ति जिनके माता-पिता, दादा-दादी 26 जनवरी 1950 के बाद प्रवासित हुए या उस क्षेत्र से हैं जो 15 अगस्त 1947 को भारत का अंग बन गया हों, वह ऐसे देश में हो जहाँ पर दोहरी नागरिकता का प्रावधान हों वे लोग सीमा पारीय दोहरी नागरिकता प्राप्त कर सकते है।
  • भारतीय नागरिकता अधिनियम 2005 के अनुसार भारत में अप्रवासी नागरिकों को ठहरने की अवधि 1 वर्ष कर दी गयी है।
  • भारत के नागरिकों को संविधान में कुछ मूल अधिकार प्राप्त हैं जो विदेशियों को नहीं प्राप्त हैं- ये निम्न है

1. अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30

2. भारतीय नागरिक ही केवल कुछ पदों पर आसीन होने के पात्र हैं। जैसे- अनुच्छेद 58(1) राष्ट्रपति का पद। अनुच्छेद 66(3) – उपराष्ट्रपति का पद, अनुच्छेद 144(3)- उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश, अनुच्छेद 217 (2)- उच्च न्यायालय का न्यायाधीश, अनुच्छेद 76 (2) – महान्यायवादी अनुच्छेद 157- राज्यपाल अनुच्छेद 165- महाधिवक्ता।

3. संसद का सदस्य – अनुच्छेद 84 तथा राज्य विधान मण्डल का सदस्य होने का अधिकार – अनुच्छेद 191(ब) केवल नागरिकों तक सीमित है।

4. लोकसभा तथा राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचन के लिए मत देने का अधिकार- अनुच्छेद 326।

  • भारत का सांवधान संधीय हैं किन्तु यहाँ एकल नागरिकता का प्रावधान है।
  • अमेरिका तथा स्विट्जरलैण्ड में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है।

CAA & CAB

    Citizenship Amendment Act ये संसद में पास होने के पहले CAR संसद में पास होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद ये बिल नागरिक संशोधन कानून बन गया। इस एक्ट के माध्यम से पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आये हिन्दु, बौद्ध, जैन, सिख, इसाई, पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है।

CAA से बाहर- इस कानून में असम के आदिवासी इलाके और मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, अरूणाचल प्रदेश, व नागालैंड को बाहर रखा गया है।

क्या भारत का बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के साथ प्रत्यावर्तन संधि है?

    किसी को उनके मूल स्थान पर वापस भेजने की प्रक्रिया प्रत्यावर्तन कहलाता है। जबकि भारत का बांग्लादेश पाकिस्तान और अफगानिस्तान से ऐसी कोई संधि नहीं है।

नागरिकता कानून 1955 के अनुसार अवैध प्रवासी कौन हैं?

    वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करने वाले लोग या वैध दस्तावेजों के साथ प्रवेश करने वाले वे लोग जो स्वीकृत अवधि के बाद भी वापस नहीं गए हैं, वे सभी अवैध प्रवासी हैं।

नए कानून के मुताबिक अवैध प्रवासी कौन हैं?

अफगानिस्तान, बांग्लादेश व पाकिस्तान से आने वाले सभी हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाई जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं उन्हें वैध प्रवासी माना जायेगा। उनके अलावा वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के साथ प्रवेश करने वाले वो लोग जो स्वीकृत अवधि के बाद भी वापस नहीं गए हैं, वे सभी अवैध प्रवासी हैं।

– पहले नागरिकता हासिल करने के लिए 11 वर्ष रहना अनिवार्य था अब यह अवधि 1 वर्ष से 6 वर्ष कर दी गई है।

विरोध क्यों?

(i) विरोधियों का कहना है कि ये कानून संविधान की मूल भावना और सेकुलरिज्म के खिलाफ है।

(ii) अवैध प्रवासियों को धार्मिक आधार पर बांटा जा रहा है।

(iii) भविष्य में NRC लाने पर सिर्फ मुस्लिमों को ही अपनी नागरकिता साबित करनी होगी जबकि बाकी छ: धर्मों को इसमें छूट मिलेगी।

(iv) असम की तर्ज पर नागरिकता साबित न करने वाले लोगों को डिटेंशन सेंटर में रखा जायेगा।

(v) पूर्वोत्तर भारत में इसका व्यापक विरोध हुआ ऐसा माना गया कि इससे North Fast की सभ्यता सांस्कृतिक, धार्मिक, भौगोलिक, संसाधन व रोजगार को प्रभावित होंगे।

(vi) Ahmadiya & Shai Muslims in Pakistan

    Artheists Bangladesh

    Tamils in Sri Lanka

    Madhesis in Nepal

    Buddhists from Tibet

    Rohingyas in Myanmar

    इन सभी गैर-मुस्लिमों को भी मानवता के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए नये बिल में शामिल किया जाये।

NRC- National Register of Citizens

    NPR देश के ‘सामान्य नागरिकों की सूची है, जिसमें सभी नागरिकों का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसे नागरिकता अधि नियम, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियमों 2003 के प्रावधानों के तहत स्थानीय (गांव/मोहल्ला/वार्ड/कस्बा, तहसील, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है।

सामान्य नागरिक कौन होते हैं?

    कोई भी निवासी जो 6 माह या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है या, ‘माह तथा उससे अधिक रहने का इरादा रख रहा है सामान्य निवासी कहेंगे।

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