मूल कर्तव्य (Part 12)

    सामान्यत: कर्त्तव्य शब्द का अभिप्राय उन कार्यों से होता है जिन्हें करने के लिए व्यक्ति नैतिक रूप से प्रतिबद्ध होता है।

    साम्यवादी देशों में पूर्व सोवियत संघ विश्व का ऐसा प्रथम देश था, जिसने अपने संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों का उल्लेख किया था। जापान के बाद भारत ऐसा दूसरा प्रजातांत्रिक देश है, जिसके संविधान में मौलिक कर्तव्य का उल्लेख किया गया है। अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के अन्योन्याश्रित होते है। जहाँ मूल अधिकार में नागरिकों के अधिकार तथा नीति निदेशक तत्वों में नागरिकों के प्रति राज्य के कर्तव्यों का उल्लेख हैं।

    नोट- अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने मौलिक कर्तव्यों को विश्लेषित नहीं किया है।

    भारतीय मूल संविधान में मूल कर्तव्यों का कोई उल्लेख नहीं था किन्तु राष्ट्रीय आपातकाल (1957-77) के दौरान मूल कर्तव्यों के लिए सरदार स्वर्ण सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में भाग-4 (क) जोड़ा गया जिसमें नया अनुच्छेद 51 (क) में भारतीय नागरिकों के लिए दस मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया।

  • यह मूल कर्तव्य रूस के संविधान से लिया गया है।

मूल कर्त्तव्यों को तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:-

    (1) नैतिक कर्तव्य 

    (2) राजनीतिक कर्तव्य                     

    (3) विशेष कर्तव्य

  • मूल कर्त्तव्य केवल भारतीय नागरिकों के लिए है। संविधान में न्यायालय के जरिए उनके क्रियान्वयन की व्यवस्था नहीं है यद्यपि संसद उसके क्रियान्वयन के लिए स्वतंत्र है।
  • मूल कर्त्तव्य का पालन कराने या उनका उल्लंघन होने पर दण्ड देने के लिए संविधान में कोई उपबंध नहीं है।

अनुच्छेद 51(क) के तहत निम्न मूल कर्तव्यों का समावेश है-

1. संविधान का पालन करे और उसके आदर्शा. संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।

2. स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करें।

3. भारत की संप्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखें।

4. देश की रक्षा करें और आहवान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।

5. देश में मेल मिलाप और भाई चारे की भावना का निर्माण हो जो सभी भेद भाव से परे हों। महिलाओं के सम्मान की रक्षा करें।

6. देश को संस्कृति और विरासत की रक्षा और सम्मान करें।

7. प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत, वन. नदी झील और वन्य जीव शामिल है उनके प्रति दया, उनकी रक्षा और उनके बढ़ाने में मदद करें।

8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का ज्ञानार्जन मानवता के सुधार और हित की भावना का विकास करें।      

9. सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा करें।

10. स्वयं और सामूहिक बेहतरी की ओर बढ़ाने का प्रयास करें जिससे देश का विकास निरंतर हो और उपलब्धियों की ओर हों।

11. 6 वर्ष की आयु से 14 वर्ष के आयु के बालकों के माता-पिता और प्रतिपाल्य के संरक्षकों का यह कर्त्तव्य होंगा कि वे उन्हें शिक्षा का अवसर प्रदान करें। (86वें संविधान संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया)

नोट : (मूल अधिकार में देखें)

    जिस प्रकार राज्यों के लिए नीति निदेशक तत्व हैं, उसी प्रकार नागरिकों के विधिक बाध्यता नहीं है। यदि कोई नागरिक मौलिक कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसे किसी दण्ड से दंडित नहीं किया जा सकता है।

नोट-

(i) मौलिक कर्तव्य लोगों पर नैतिक उत्तरदायित्व आरोपित करते हैं।

(ii) मौलिक कर्तव्यों में से कुछ कर्तव्य नैतिक हैं, तो कुछ नागरिक। उदा० स्वरूप- राष्ट्रीय ध्वज तथा राष्ट्रगान का आदर करना नागरिक का कर्तव्य है जबकि स्वतंत्रता संग्राम के उच्च आदर्शों का सम्मान एक नैतिक कर्तव्य।

(iii) मूल कर्त्तव्य नागरिकों के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो नागरिकों में अनुशासन और प्रतिबद्धता को बढ़ाते हैं।

(iv) 9वाँ मौलिक कर्तव्य सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अत्यधिक प्रासंगिक हो गई है विरोध प्रदर्शन में सबसे ज्यादा क्षति सार्वजनिक सम्पत्ति का होता है।

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