संघ और उसके राज्य क्षेत्र (Part 8)

Union संघ- Union का निर्माण विलयपत्र आदि के माध्यम से किया जाता है जिसमें संघ के सदस्यों को स्वतंत्रता नहीं होती है, केंद्र सरकार के फैसले इकाईयों पर बाध्यकारी होते हैं । किसी भी प्रकार के परिवर्तन के लिए बहुमत की आवश्यकता होती है। जैसे- काफी हद तक भारत

Fedresion परिसंघ– यह एक स्वयंशासित राज्यों के द्वारा समझौते के आधार पर बनाया जाता है। सभी इकाईयां एक केंद्र सरकार के अधीन होती है। केंद्र सरकार के निर्णय सभी इकाईयों पर बाध्यकारी होते हैं। संविधान में बदलाव के लिए सभी सदस्यों की अनुमति आवश्यक होती है। जैसे- अमेरिका

    संविधान के भाग 1 में अनुच्छेद 1 से अनुच्छेद 4 तक संघ और राज्य क्षेत्र की व्याख्या की गई है।

    अनुच्छेद 1 के अनुसार भारतीय क्षेत्र को तीन श्रेणियों में बांटा गया है।

    (1) राज्यों के राज्य क्षेत्र                     (2) संघ क्षेत्र

    (3) ऐसे राज्यक्षेत्र जो भारत सरकार द्वारा अर्जित किया जाए

  • वर्तमान में भारतीय संघ में 28 राज्य तथा 9 केंद्रशासित प्रदेश हैं।
  • भारत को संविधान में प्रभुत्व सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य को राज्यों का संघ घोषित किया गया है। अमेरिकी संघवाद की तरह भारतीय संघवाद आपस में किसी समझौते का परिणाम नहीं है। राज्य अपनी इच्छा से परिसंघ से अलग नहीं हो सकते है, और न ही अपने राज्य क्षेत्र में परिवर्तन कर सकते हैं।
  • संविधान में भारत को राज्यों का संघ घोषित किया गया है। इसके लिए ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों का एकीकरण किया गया था
  • ब्रिटिश सरकार ने 12 मई 1947 को देशी रियासतों पर एक श्वेत पत्र जारी किया जिसके आधार पर सम्राट की सर्वोच्च शक्ति को समाप्त कर उन्हें स्वतंत्र किया गया।
  • स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में स्थित 562 देशी रियासतों में 559 रियासतों को सरदार बल्लभ भाई पटेल की सूझ-बूझ से भारत में स्वेच्छा से विलय कर लिया था। किन्तु तीन रियासतों जूनागढ़, हैदराबाद तथा जम्मू कश्मीर ने अपने को शामिल नहीं किया था। कुछ समय पश्चात जूनागढ़ रियासत जनमत संग्रह के द्वारा, हैदराबाद की रियासत पुलिस कार्यवाही द्वारा तथा जम्मू कश्मीर रियासत के शासक ने पाकिस्तानी कबाइलियों के कारण विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर शामिल हुए।

नोट- हैदराबाद को ऑपरेशन Polo (1948) द्वारा मिलाया गया। इस तरह देशी रियासतों तथा ब्रिटिश प्रान्तों का एकीकरण करके भारत में 4 प्रकार के राज्यों का गठन किया गया

मूल संविधान-1949 में शामिल राज्य-

  • सातवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 तक भारतीय राज्यों के संघ के भाग (ख) में राजस्थान, सौराष्ट्र, त्रावणकोर-कोचीन, विध्य-प्रदेश तथा भाग (ग) में दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, कच्छ, मणिपुर, त्रिपुरा हो गये थे।

अनुच्छेद (2) संसद को दो प्रकार की शक्ति प्रदान करता है-

1. नये राज्यों को संघ में शामिल करने की शक्ति जो पहले से शामिल है।

2. नये राज्यों को स्थापित करने की शक्ति जो भारतीय संघ का हिस्सा नहीं है।

अनुच्छेद (3) संसद को निम्न शक्ति प्रदान करता है-

1. किसी राज्य में से उसका राज्य क्षेत्र अलग करके या दो या अधिक राज्यों को मिलाकर नये राज्य का निर्माण करेंगी।

2. किसी राज्य के क्षेत्र में विस्तार

3. किसी राज्य के क्षेत्र को घटा सकती है

4. किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन

5. किसी राज्य के नाम में परिवर्तन करेंगी।

    नोट:- संघ किसी राज्य को समाप्त कर सकती है किन्तु राज्य नहीं।

संघ राज्यों के पुर्नगठन पर आयोग-

1. भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन-

    सर्वप्रथम ब्रिटिश काल में 1912 में भाषायी आधार पर तीन राज्य, उड़ीसा, असम तथा बिहार का गठन किया गया था तेलुगु, कन्नड़ तथा मराठी भाषी जनता के दबाव में 1948 को सेवानिवृत न्यायाधीश एस० के० धर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय भाषायी प्रान्तीय आयोग (Linguistic Provinces Commission) का गठन किया गया था जिसकी 1948 में प्रस्तुत रिपोर्ट में प्रशासनिक आधार पर राज्यों के गठन की रिपोर्ट का विरोध किया गया।

  • जे वी पी समिति- काँग्रेस कार्य समिति ने जयपुर अधिवेशन में (दिसम्बर 1948) जवाहर लाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल तथा पट्टाभिसीतारमैया की एक समिति राज्यों के पुर्नगठन पर विचार करने के लिए गठित की। जिसकी रिपोर्ट में भाषा के आधार पर गठन को अस्वीकार कर दिया गया था। किन्तु अप्रैल 1949 की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जनभावना को देखते हुए उनकी माँग को स्वीकार कर लेना चाहिए।
  • इस आधार पर 1 अक्टूबर, 1953 को भारत सरकार ने तेलुगु भाषियों की माँग को मानते हुए मद्रास से पृथक करते हुए प्रथम भाषा के आधार पर आन्ध्र प्रदेश राज्य का गठन किया।
  • फजल अली आयोग – भारत सरकार ने 22 दिसम्बर 1953 को तीन सदस्यीय राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया था जिसमें आयोग के अध्यक्ष फजल अली तथा दो अन्य सदस्य के. एम. पणिक्कर तथा एच. एन. कुंजरू थे। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1955 में पेश किया जिसमें एक राज्य एक भाषा के सिद्धान्त को अस्वीकार कर दिया था जिसमें 16 राज्यों तथा 3 केन्द्रीय प्रशासनिक क्षेत्रों के निर्माण की सिफारिश की थी।
  • केन्द्र सरकार ने कुछ संशोधनों के साथ फजल अली आयोग की रिपोर्ट को संसद में प्रस्तुत किया जिसे 7वें संविधान संशोधन अधिनियम 1956 पारित करते हुए अनुच्छेद । में संशोधन किया | तथा राज्यों की चार श्रेणियों (1, 2, 3. 4) को समाप्त कर तीन वर्गों में विभाजित किया। परिणामस्वरूप । नवम्बर 1956 को 14 राज्यों और 6 संघ राज्य क्षेत्रों का गठन किया गया।
  • भारतीय संविधान के उपबन्धों के अनुसार संसद सामान्य बहुमत से विधि बनाकर नये राज्यों की स्थापना तथा वर्तमान राज्यों के नामों में, सीमाओं में तथा राज्य के क्षेत्रों में परिवर्तन कर सकती है।
  • प्रथम शर्त के अनुसार इस प्रक्रिया में विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश से संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत होगा किन्तु किसी राज्य के नाम, सीमा में परिवर्तन से संबंधित विधेयक राष्ट्रपति उस राज्य के विधान मण्डल के पास विचार करने के लिए भेजेगा।

    अनुच्छेद 4 – 2 व 3 के तहत किया गया परिवर्तन अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जायेगा।

नए राज्य क्षेत्र को अपने में मिलाने के निम्न तरीके हो सकते हैं-

    अभ्यर्पण (Cession)- जब कोई राज्य क्षेत्र कोई देश अपनी स्वेच्छा से देदे तब वह भारत का हो जायेगा जैसे- पुदुचेरी फ्रास द्वारा 1954 में देने की पेशकश की, चंदनगर 1952 में फ्रांस द्वारा देने की पेशकश की गई, भूटान पूर्णतया अभ्यर्पण नहीं कहा जा सकता केवल वाह्य मामले में कह सकते हैं भूटान की विदेशों नीति भारत निर्देशित करेगा सभी वैदेशिक मामले भारत के पास आ गये 2007 में यह संधि समाप्त हो गई।

    अपवृद्धि (Aceretion)- प्राकृतिक कारणों से कोई क्षेत्र भारत में आकर मिल जाये जैसे कच्छ का रन (काफी हद तक) आवेशन (0ccupation)- जिस क्षेत्र पर किसी का कब्जा न हो वहां हम अपना कब्जा कर ले। तो वह हमारा हो जायेगा जैसे न्यूमूर द्वीप।

    चिरभोग (Prescription)- जहां हम पूर्व से अपनी सम्प्रभुता शान्तिपूर्ण तरीके से स्थापित कर ले ले। जैसे- हिमाद्री, गंगोत्री आदि।

संविधान इस पूर्वगामी शक्ति का प्रयोग निम्न प्रकार से किया गया-

1. मद्रास राज्य से तेलुगु भाषी क्षेत्र को अलग कर ।953 में आन्ध्र प्रदेश राज्य का गठन किया गया।

2. 1954 में हिमाचल प्रदेश और बिलासपुर राज्य को विलय करहिमाचल प्रदेश का गठन किया गया।

3. राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत एक अलग राज्य केरल बनाया गया।

4. मुम्बई पुनर्गठन अधिनियम 1960 द्वारा मुम्बई राज्य से दो राज्य महाराष्ट्र और गुजरात बनाया गया।

5. असम राज्य से नागा पहाड़ी और ट्युएनसांग क्षेत्र को अलग कर नागालैण्ड राज्य अधिनियम द्वारा 1962 में संविधान की छठी अनुसूची से इस जनजाति क्षेत्र को अलग कर दिया गया।

6. 1966 में पंजाब राज्य को दो भाग में बाँटकर पंजाब और हरियाणा तथा चंडीगढ़ संघ राज्य में बाँटा गया।

7. 1969 में असम राज्य से मंघालय राज्य का गठन किया।

8. 1970 में हिमाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा दिया गया।

9. 1968 में मद्रास का नाम परिवर्तित कर तमिलनाडु कर दिया गया।

10. पांडिचेरी (करायकल, माहे और यमन) को 1954 में भारत ने फ्रांसीसी सरकार से प्राप्त किया था जो 1962 में संघ राज्य क्षेत्र बना गया।

11. 35वाँ संविधान संशोधन 1974 द्वारा सिक्किम को भारत का सहयुक्त राज्य बनाया गया।

12. दमण और दीव को 12वें संविधान संशोधन 1962 1 द्वारा संघ राज्य क्षेत्र बनाया गया।

13. लकादीव, मिनिकोय और अमीनदीवी द्वीप समूह का नाम बदलकर 1973 में लकादीव कर दिया गया था।

  • 1991 में 69वाँ संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 239 में (क.क) को जोड़कर दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र घोषित किया गया।
  • 24 जनवरी, 1950 को संयुक्त प्रांत (United Province) का नाम उत्तर प्रदेश कर दिया गया।
  • 30 मई 1987 में गोवा, दमन और दीव पुनर्गठन के माध्यम से गोवा को दमन और दीव से अलग करके गोवा को भारत का 25वां राज्य बना दिया गया है जबकि दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश ही रहे।
  • 1 नवंबर, 2000 को छत्तीसगढ़ को भारत का 26वां स्वतंत्र राज्य बनाया गया।
  • 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखण्ड को भारत का 27वां स्वतंत्र राज्य बनाया गया।
  • 15 नवंबर, 2000 को झारखण्ड को भारत का 28वां स्वतंत्र राज्य बनाया गया।
  • 2 जून, 2014 को तेलंगाना को भारत का 29वां स्वतंत्र राज्य बनाया गया।

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