संविधान की विशेषताएं (Part 3)

परिसंघात्मक और एकात्मक लक्षण:-

    संविधान निर्माणकर्ताओं ने संविधान को दो वर्गों में विभाजित किया है

    (i) एकात्मक संविधान:- इसके अन्तर्गत सारी शक्तियाँ एक हो सरकार में समाहित होती है अर्थात केन्द्रीय सरकार और इकाइयों के प्राधिकारी केन्द्रीय सरकार के अधीन उनके ऐजेंटों के रूप में कार्य करते हैं।

    केन्द्रीय सरकार इकाइयों को जो प्राधिकार प्रत्यायोजित करते है इकाईयाँ उन्ही का प्रयोग करती है। उदाहरण- ब्रिटेन

    उदाहरण स्वरूप- एक सशक्त केंद्र, एक संविधान, एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका, केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति, अखिल भारतीय सेवाएँ, आपातकालीन उपबंध इत्यादि।

    (ii) परिसंघात्मक या परिसंघीय- इस प्रकार के विधान में शक्तियों का केन्द्र और राज्यों में विभाजन रहता है और केन्द्र और राज्य की सरकारें स्वतन्त्र रूप से अपने क्षेत्रों में कार्य करती हैं।

  • संविधान के मूल ढाँचे में कहीं भी परिसंघात्मक (Federal) या परिसंघ (Federation) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है ।
  • अमेरिका का संविधान विश्व के परिसंघ संविधानों में सन् 1787 में लिखित सर्वाधिक प्राचीन संविधान है।
  • भारतीय संविधान निर्माताओं के अनुसार भारतीय संविधान एक परिसंघात्मक संविधान हैं। किन्तु कुछ संविधानवेत्ता प्रोफेसर ह्वियर और प्रोफेसर जेनिंग्स भारतीय संविधान को संघात्मक मानने से इंकार करते हैं।

    उदाहरण- लिखित संविधान, दो सरकार, स्वतंत्र न्यायपालिका, संविधान की सर्वोच्चता इत्यादि।

संघात्मक संविधान के मुख्य लक्षण-

    (i) केन्द्रीय और प्रान्तीय सरकारों के बीच शक्तियों का बँटवारा रहता है। अर्थात् प्रत्येक सरकारें अपने-अपने क्षेत्र में सर्वोपरि के साथ ही एक दूसरे की सहयोगी होती है। शक्तियों का सहयोगी संस्थाओं में विकेन्द्रीकरण होता है।

    (ii) सरकार के सभी अंगों जिनमें कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका है का स्रोत होता है जो उनकी शक्तियों पर नियंत्रण रखता है।

    (iii) परिसंघीय राज्य का जन्म संविधान से होता है।

    (iv) संघीय संविधान में केन्द्रीय और प्रान्तीय सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन एक लिखित संविधान द्वारा किया जाता है। विभिन्न सरकारें संविधान के उपबन्धों का अपने पक्ष में निर्वाचन कर सकती है। किन्तु मतभेद की स्थिति में निष्पक्ष और स्वतंत्र अन्तिम निर्णय देने का अधिकार संविधान की संघीय व्यवस्था में न्यायपालिका को दिया गया है।

    (v) व्यवहारिक रूप से लिखित संविधान अनम्य (Rigid) होता है। किसी सविधान की अनम्यता और नम्यता (Flexible) उसके संशोधन की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। जिस संविधान में संधोधन की प्रक्रिया कठिन होती है वह अनम्य और जिस संविधान में संशोधन की प्रक्रिया सरल होती है वह नम्य संविधान कहलाता है। अर्थात् संविधान परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन शील होते है।

    (vi) संघीय प्रणाली में दोहरी नागरिकता का विधान होता है।

  • भारत का संविधान अनोखा है, यह न तो शुद्ध रूप से परिसंधीय है और न शुद्ध रूप से ऐकिक। यह दोनों का संयोजन अर्थात् एक प्रकार से नए प्रकार का संघ या सम्मिलित राज्य है।

    (vii) भारत के संविधान को अद्धपरिसंघीय (Quasi – Federal) कहा गया है जिसमें परिसंघीय और एकात्मक दोनों की विशेषताएं हैं।

    (viii) भारत के संविधान में दोहरी राजव्यवस्था पद्धति है जिनमें

    (i) केन्द्रीय सरकार

    (ii) प्रान्तीय या राज्य सरकार

  • भारतीय संविधान देश की सर्वोच्च विधि और लिखित तथा प्रकृति में अर्द्ध-संघीय संविधान हैं।
  • आपात उपबन्ध 352 से 360 अनुच्छेद भाग 18 तक संविधान के एकात्मक रूप दिया जा सकता है।
  • संविधान को पेश करते समय प्रारूपण समिति के अभ्यक्ष डॉ० अम्बेडकर ने “यूनियन ऑफ स्टेट्स” पद का प्रयोग किया था।
  • भारतीय संघात्मक व्यवस्था एक परिवर्तनशील व्यवस्था है और आवश्यकतानुसार एकात्मक और संघात्मक दोनों ही रूप धारण कर लेती है।
  • एस आर बाम्मई बनाम भारत संघ के मामले में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का मत है कि भारतीय संविधान परिसंघवाद संविधान का आधारभूत ढांचा है।
  • अनुच्छेद 1 में भारत को राज्यों का संघ कहा गया है जिसका अर्थ है किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है और न ही भारतीय संघ राज्य के किसी समझौते का परिणाम है।

सरकार का गठन- संघात्मक संविधान के अन्तर्गत सरकार की स्थापना संसदीय तथा अध्यक्षात्मक प्रकार से की जा सकती हैं। संसदीय प्रणाली का जन्म ब्रिटेन में हुआ। ब्रिटेन का संविधान एकात्मक, अलिखित और वंशानुगत राजा वाला सविधान है।

  • भारतीय संविधान में संसदीय सरकार की स्थापना की गई है। सरकार का स्वरूप इंग्लैण्ड की सरकार के समान हैं क्योंकि 1919 और 1935 के भारतीय अधिनियमों के अन्तर्गत संसदीय शासन का अनुभव था।
  • अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली में समस्त कार्यकारिणी शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है। राष्ट्रपति का निर्वाचन सीधे जनता द्वारा किया जाता है। अमेरिका की सरकार अध्यक्षात्मक होती है वहाँ मन्त्रिमंडल के सदस्य विधान मंडल के सदस्य नहीं होते हैं।
  • संसदीय प्रणाली को सरकार के रूप में उत्तरदायी सरकार और मंत्री मण्डलीय सरकार के रूप में जाना जाता है। भारत में केन्द्र और राज्य दोनों स्तरों पर संसदीय शासन प्रणाली का अपनाया गया है।
  • भारतीय संविधान ने संसदीय प्रणाली को अपनाया तथा कार्यपालिका विधानपालिका के प्रति उत्तरदायी हैं तथा भारत का अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति है जिसके नाम से सभी केन्द्रीय सरकार के काम होते हैं।

संसदीय प्रभुत्व बनाम न्यायिक सर्वोच्चता-

  • ब्रिटेन को संसदीय प्रणाली में संसद प्रभुत्व संपन्न और सर्वोच्च हैं। न्यायपालिका का विधान का न्यायिक पुनरीक्षण करने का कोई अधिकार नहीं हैं।
  • जबकि अमरीकी शासन प्रणाली में शक्तियों का पृथक्करण होता है। वहाँ उच्चतम न्यायालय सर्वोच्च है।
  • भारत में संसद और सर्वोच्च न्यायालय अपने क्षेत्र में सर्वोच्च हैं। भारतीय संविधान में अमरीकी न्यायिक सर्वोच्चता और ब्रिटिश संसद की प्रभुता दोनों का मिश्रण है।

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